AKULAHTE...MERE MAN KI

bhavnaow ki abhivayakti ka ........ak aur khula darwaja

25 Posts

702 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 8762 postid : 199

कुछ हाइकु ....

  • SocialTwist Tell-a-Friend

आदरणीय गुणीजनों के अनुरोध पर मैं हाइकु‘ पे थोडा सा प्रकाश डाल रही हूँ / आशा है आप सबको क्षणिकाएं और हाइकु‘  में शिल्पगत अंतर समझाने में मैं सफल रहूंगी /   
 

हाइकु‘   जापानी साहित्य की प्रमुख विधा है। हिंदी साहित्य की अनेकानेक विधाओं में ‘हाइकु’ नव्यतम विधा है।

हाइकु को काव्य-विधा के रूप में प्रतिष्ठा प्रदान की मात्सुओ बाशो (१६४४-१६९४) ने। बाशो के हाथों सँवरकर हाइकु १७वीं शताब्दी में जीवन के दर्शन से अनुप्राणित होकर जापानी कविता की युग-धारा के रूप में प्रस्फुटित हुआ। आज हाइकु जापानी साहित्य की सीमाओं को लाँघकर विश्व-साहित्य की निधि बन चुका है।

 

हाइकु कविता को भारत में लाने का श्रेय कविवर रवींद्र नाथ ठाकुर को जाता है।हाइकु कविता आज विश्व की अनेक भाषाओं में लिखी जा रही/हाइकु सत्रह (१७) अक्षर में लिखी जाने वाली सबसे छोटी कविता हैइसमें तीन पंक्तियाँ रहती हैं। प्रथम पंक्ति में ५ अक्षर, दूसरी में ७ और तीसरी में ५ अक्षर रहते हैं। संयुक्त अक्षर को एक अक्षर गिना जाता है, जैसे सुगन्धमें तीन अक्षर हैं – सु-१, ग-१, न्ध-१) तीनों वाक्य अलग-अलग होने चाहिए। अर्थात एक ही वाक्य को ५,७,५ के क्रम में तोड़कर नहीं लिखना है। बल्कि तीन पूर्ण पंक्तियाँ हों।

 

हाइकु कविता में ५-७-५ का अनुशासन तो रखना ही है, क्योंकि यह नियम शिथिल कर देने से छंद की दृष्टि से अराजकता की स्थिति आ जाएगी।हाइकु में एक भी शब्द व्यर्थ नहीं होना चाहिए। हाइकु का प्रत्येक शब्द अपने क्रम में विशिष्ट अर्थ का द्योतक होकर एक समन्वित प्रभाव की सृष्टि में समर्थ होता है।

 

यदि ५-७-५ में नहीं लिख सकते तो फिर मुक्त छंद में अपनी बात कहिए, क्षणिका के रूप में कहिए उसे ‘हाइकु’ ही क्यों कहना चाहते हैं? अर्थात हिंदी हाइकु में ५-७-५ वर्ण का पालन होता रहना चाहिए यही हाइकु के हित में हैं।

 

—————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————————- 

 

१. बौराया आम
  चहका उपवन
   आया बसंत

 

२. गरजे घन
नाच उठा किसान
बुझेगी प्यास

 

३.दहेज़ भारी
कुरीतियों की मारी
वधु बेचारी

 

४.अंकुर बनी
अभी नहीं खिली थी
भ्रूण ही तो थी

 

५.शोर है कैसा
कुर्सी पे तो है बैठा
   अपना नेता

 

धर्म की आड़
बाबाओ का व्योपार
   दुखी संसार

 

७. ठाट बाट में
कानून की आड़ में
   कैदी दामाद

  

८. टूटे सपने

डिग्रियां बनी भार 

 बेरोजगार
 
 

९.व्याकुल मन
लगे जैसे है स्वर्ग
मैया की गोद

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (8 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

71 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
07/05/2012

३.दहेज़ भारी कुरीतियों की मारी वधु बेचारी ९.व्याकुल मन लगे जैसे है स्वर्ग मैया की गोद महिमा जी ..सुन्दर हाइकु अच्छे सन्देश लिए हुए ..बधाई …जय श्री राधे भ्रमर ५

gauravsaxena के द्वारा
02/05/2012

thanks for the wonderful article …. Mahima ji

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    02/05/2012

    आपका स्वागत है गौरव जी , हार्दिक धन्यवाद

pawansrivastava के द्वारा
01/05/2012

महिमा जी सबसे निचे हीं सही पर आपके दोस्तों की फेरिस्तों में हम भी हैं ….फिर हमसे यह बहुमूल्य हीरा क्यूँ छिपाया ….एक मेल कर देतीं……मैं जागरण का प्रथम पृष्ठ नहीं देखता तो कई बार ऐसी खूबसूरत ज्ञान-प्रद आलेखों से वंचित रह जाता हूँ ….पर आपका तो मैंने ‘follow my blog’ ka option bhi subscribe kiya hua hai ..फिर भी इसके बाबत कोई मेल नहीं आया …..बहुत खूबसूरत विधा है यह हाइकु ….शब्दों को समीचीन और संक्षिप्त रखकर प्रभावशाली बातें कहना ….यह साहित्य जगत का २० -२० मैच है …पर मेरे मुफीद नहीं …मैं व्याकरणिक बाड़े में बंधकर अपनी बातें नहीं कह सकता ….मैं अंजुल में समंदर नहीं उतार सकता ….मैं तो कम शब्दों में ऐसी हीं कुछ बातें कह सकता हूँ जो हैकु नहीं है – कब्र से चलेगा राहिला मुर्दों का चुपचाप जमीन के अन्दर और जब मुर्दों की भीड़ किसी चौराहे पर मिल जाएगी … सतह से ऊँची उठी हर एक विशाल अट्टालिकाएं हिल जाएगी

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    02/05/2012

    पवन जी कैसी बात कर रहे है हां ठीक है मैंने आपको इसके बाबत मेल नहीं किया .. क्षमा :) और आप तो सबसे उपर दिख रहे है जनाब ……:) :) आपने हिरा कह दिया ….. इनाम मिल गया … हार्दिक धन्यवाद .. बाप रे बाप इतना खरनाक क्षणिका आज रात मुझे डरावने सपने आयेंगे …. मुर्दों के :) :) माइकल जाक्सन का एक विडिओ आपकी इसी क्षणिका का दृश्य उपस्थित करता है .. नाम नहीं याद आ रहा .. शुरुआत का समय का …

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
30/04/2012

स्नेही महिमा, shubhashish इस विधा की जानकारी अभी जल्दी ही हुई है. अभी पढ़ नहीं पाया हूँ. आपने जानकारी दी आभार. बाकी तो अच्छा लिखती ही हैं आप. बढती रहिये. शुभ कामना.

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    02/05/2012

    आदरणीया सर , प्रणाम , आपका आशीर्वाद हमेशा मिलता रहे … बस यही कामना है .. बहुत होसला मिलता है .. हार्दिक धन्यवाद

akraktale के द्वारा
26/04/2012

महिमा जी सादर नमस्कार, आपने लेखन की एक और नई विद्या से परिचय कराया. आपका बहुत बहुत सुक्रिया. .दहेज़ भारी कुरीतियों की मारी वधु बेचारी सुन्दर हाइकु रचना पर बधाई.

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    26/04/2012

    आदरणीय अशोक सर , नमस्कार , स्वागत है आपका ….. आपक हार्दिक धन्यवाद

omdikshit के द्वारा
26/04/2012

महिमा जी, नमस्कार. बहुत अच्छी ‘हाइकु’. सरिता जी ने अपनी प्रतिक्रिया ……छंद,ग़ज़ल या शेर या ….? किसमे व्यक्त किया है.कृपया हमें भी बताएं.

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    26/04/2012

    आदरणीय ओम जी नमस्कार , स्वागत है आपका ….. धन्यवाद

कुमार गौरव के द्वारा
25/04/2012

महिमा जी सादर! चलिए साहित्य की एक और विधा की जानकारी आपके माध्यम से हुई…मेरे फेवरेट नेता जी के बारे में जरुर जानियेगा मेरे ब्लॉग पर आकर…साभार…

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    सवागत है आपका गौरव जी, जरुर

sinsera के द्वारा
25/04/2012

उफ्फ्फ्फफ्फफ्फ्फ़……….तो ये है हाइकू….अब दिल के दुखड़े सुनाने के लिए भी कायदे कानून की ज़रूरत होगी??? नावाकिफ थे चाहत के उसूलों से इस लिए हम खार हुए , न किसी ने अपना बनाया न किसी के काबिल छोड़ा !

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    सरिता दी .वाह !! सो सुनार की एक लुहार की इस लिए तो हम आपके मुरीद है …. :)

25/04/2012

धन्य हो माते ……….अब तो विपक्ष और विपक्षियों…….सबकी वात लगाने वाली है……थोड़ी सी बात के लिए इतना बड़ा प्रबचन……

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    वत्स मैंने बस जानकारी साझा करने की कोशिश की है …….. अब बाबाओं को हर चीज प्रवचन ही नजर आये तो कोई क्या करें ……….. :)

rekhafbd के द्वारा
25/04/2012

महिमा जी ,हाइकु के बारे में अपने ज्ञान दिया धन्यवाद ,कम शब्दों में विचारों को ब्यान कर दिया ,बहुत खूब ,बधाई

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    आदरणीया रेखा जी , सादर नमस्कार, स्वागत है आपका ह्रदय से धन्यवाद , स्नेह बनाये रखे …

Rajkamal Sharma के द्वारा
24/04/2012

हाय हुकू – हाय हुकू हाय – हाय इस गाने से तो हम सभी परिचित थे लेकिन इस मंच पर इस हाइकु की हाई टी.आर.पी. आपके ही कारण है “अभी तक” तो आभार सहित मुबारकबाद बिना मुस्कान के

    jlsingh के द्वारा
    25/04/2012

    बिन मुस्कान के हाय हुकू कमाल महिमा खास …………… गुरु अंदाज तीर तरकस के लक्ष्य संधान …………. मेरी कोशिश बेकार तकरार भूलो न यार!

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    जवाहर सर ,नमस्कार , प्रोत्साहन के लिए आभारी हूँ , आपका ह्रदय से धन्यवाद

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    प्रभु …. बिन मुस्कान के भी आप अच्छे लगते हो :) परिवर्तन अच्छा लगता है … जय गुरु देव

follyofawiseman के द्वारा
24/04/2012

तीन-चार महीना पहले मैं के कविता कोष पर किसी लेखिका ही कुछ ‘हाइकु‘ पढ़ा था……तब भी मैं बहुत निराश हुआ था…..और आज भी बहुत दुखी हुआ….. अपने शब्दो का संयोजन तो बैठा लिया है….पर शब्द ही सब कुछ नहीं होता है….. बशों की कुछ ‘हाइकु‘  मैं नीचे पेश कर रहा हूँ………. The old pond A frog jumps in The sound of water. It is deep autumn My neighbor How does he live, I wonder. I can just shed tears………शायद बशों भी आज रो रहा होगा……..!

    jlsingh के द्वारा
    25/04/2012

    बाशों की आत्मा संदीप की पुकार रही कराह!

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    प्रिय संदीप जी , मैं आपसे असहमत नहीं हूँ क्योकि बसों की शैली से बिलकुल अलग है हिंदी में प्रचलित हायकू … सर्व प्रथम तो बाशो ने हायकू को सिर्फ प्रकृति की सुन्दरता और विविधता की प्रस्तुति का माध्यम बनाया है ….उसमे कही भी व्यंग या सामाजिक कटाक्ष का स्थान नहीं है और ५/७/५ जैसा शिल्प का नियम भी नहीं है .. अतः हिंदी साहित्य में प्रचलित हायकू सर्वथा बशों के हायकू से भिन्न है ..पर चूँकि मैं हिंदी में लिखती हूँ और पढ़ती हूँ अतः यहाँ जो प्रचलित हायकू के जो नियम है उसी का पालन करुँगी …. बाकि जो मैंने हायकू का हिंदी साहित्य में जाने माने विद्वान का क्या सोचना है मैं यहाँ उधृत कर रही हूँ …………………………………. हाइकु काव्य का प्रिय विषय प्रकृति रहा है। हाइकु प्रकृति को माध्यम बनाकर मनुष्य की भावनाओं को प्रकट करता है। हिंदी में इस प्रकार के हाइकु लिखे जा रहे हैं। परंतु अधिकांश हिंदी हाइकु में व्यंग्य दिखाई देता है। व्यंग्य हाइकु कविता का विषय नहीं है। परंतु जापान में भी व्यंग्य परक काव्य लिखा जाता है। क्योंकि व्यंग्य मनुष्य के दैनिक जीवन से अलग नहीं है। जापान में इसे हाइकु न कहकर ‘सेर्न्यू’ कहा जाता है। हिंदी कविता में व्यंग्य की उपस्थिति सदैव से रही है। इसलिए इसे हाइकु से अलग रखा जाना बहुत कठिन है। इस संदर्भ में कमलेश भट्ट ‘कमल’ का विचार उचित प्रतीत होता है – “हिंदी में हाइकु और ‘सेर्न्यू’ के एकीकरण का मुद्दा भी बीच-बीच में बहस के केंद्र में आता रहता है। लेकिन वस्तुस्थिति यह है कि हिंदी में हाइकु और ‘सेर्न्यू’ दोनों विधाएँ हाइकु के रूप में ही एकाकार हो चुकी है और यह स्थिति बनी रहे यही हाइकु विधा के हित में होगा। क्योंकि जापानी ‘सेर्न्यू’ को हल्के-फुल्के अंदाज़ वाली रचना माना जाता है और हिंदी में ऐसी रचनाएँ हास्य-व्यंग्य के रूप में प्राय: मान्यता प्राप्त कर चुकी हैं। अत: हिंदी में केवल शिल्प के आधार पर ‘सेर्न्यू’ को अलग से कोई पहचान मिल पाएगी, इसमें संदेह है। फिर वर्ण्य विषय के आधार पर हाइकु को वर्गीकृत/विभक्त करना हिंदी में संभव नहीं लग रहा है। क्योंकि जापानी हाइकु में प्रकृति के एक महत्वपूर्ण तत्व होते हुए भी हिंदी हाइकु में उसकी अनिवार्यता का बंधन सर्वस्वीकृत नहीं हो पाया है। हिंदी कविता में विषयों की इतनी विविधता है कि उसके चलते यहाँ हाइकु का वर्ण्य विषय बहुत-बहुत व्यापक है। जो कुछ भी हिंदी कविता में हैं, वह सबकुछ हाइकु में भी आ रहा है। संभवत: इसी प्रवृत्ति के चलते हिंदी की हाइकु कविता कहीं से विजातीय नहीं लगती।” कमलेश भट्ट कमल, ‘हिंदी हाइकु : इतिहास और उपलब्धि’ – संपादक- डॉ. रामनारायण पटेल ‘राम’ पृष्ठ-४२) बाकि जो हिंदी में प्रचलित हायकू के नियम है मैंने मुख्य पन्ने में यथा रखा दिया है ….

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
24/04/2012

महिमा जी , सार्थक प्रस्तुति …….. बधाई !!

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    आदरणीय आचार्य गुंजन जी , नमस्कार स्वागत है आपका , आपका ह्रदय से धन्यवाद

24/04/2012

चिंग चांग टुंग टांग, केपचु, केपचु……छापंग छापंग टोमा हाइकु टिंग टांग पटांग पटांग……

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    02/05/2012

    उटंग पटांग बाबा है थोडा उटंग पटांग ……………………………..

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
24/04/2012

मजा आ गया जी, हाइकू में अब मैं भी कुछ लिखूंगा.

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    अंकुर जी नमस्कार , धन्यवाद .. अवश्य लिखे इसलिए तो यहाँ विस्तार दिया गया है ….

वाकई बेहतर अंकुर बनी अभी नहीं खिली थी भ्रूण ही तो थी

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    ज्ञानेंद्र जी नमस्कार , स्वागत है आपका , आपका धन्यवाद /

Jayprakash Mishra के द्वारा
24/04/2012

घाव करैं गम्भीर……….आपकी रचनाओं  के लिये यही उक्ति काफी है महिमा जी

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    25/04/2012

    नमस्कार जयप्रकाश जी , आपका ह्रदय से धन्यवाद …

minujha के द्वारा
24/04/2012

महिमा जी हाइकु की सोदाहरण विस्तृत जानकारी लाभप्रद और अच्छी लगी,बहुत सुंदर

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीया मीनू दी , सादर नमस्कार , आपको अच्छी लगी , उत्साहवर्धन के लिए आपकी आभारी हूँ , ह्रदय से धन्यवाद …

Mohinder Kumar के द्वारा
24/04/2012

महिमा जी, अर्थपूर्ण हाईकू पढवाने के लिये आभार… लिखते रहिये

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय मोहिंदर जी नमस्कार , स्वागत है आपका , आपके उत्साहवर्धन के लिय ह्रदय से धन्यवाद ,

sadhna के द्वारा
24/04/2012

महिमा जी कल मैंने इसे पढ़ा था लेकिन कुछ समझ में नहीं आया था….. दरअसल “हाइकु” क्या है ये नहीं जानती थी….. :) बहुत अच्छा लिखा है!

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    प्रिय साधना जी , आपका ह्रदय से धन्यवाद , आशा है अब आपको मई थोडा समझाने में सफल हो गयी हूँ तभी आपकी प्रतिकिर्या आई है ..आपने समय दिया सराहा , आभारी हूँ . १० दिन पहले मै भी नहीं जानती थी :)

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
24/04/2012

बहुत सुन्दर हायकू बन पड़े हैं,महिमा जी.शायद ये जापानी शैली की कविता है.कुछ प्रकाश डालें तो अच्छा हो. ३.दहेज़ भारी कुरीतियों की मारी वधु बेचारी ४.अंकुर बनी अभी नहीं खिली थी भ्रूण ही तो थी सुन्दर पंक्तियाँ.

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय राजीव सर , आप सभी गुणीजनों के कहे अनुसार मैंने शुरुआत में हायकू के बारे में जानकारी डाल दी है आशा है इससे आप सभी को संतुष्टि थोड़ी बहुत मिल जाएगी , सही कहा आपने ये जापानी शैली है …..आपका ह्रदय से धन्यवाद

    jlsingh के द्वारा
    25/04/2012

    झा जी, प्रणाम! मैथिल विद्यापति सुर संग्राम! वाह, वाह ! यह भी हो गया हायकू! गुस्ताखी माफ़! शब्दों का संयोजन बड़ी है मुश्किल!

dineshaastik के द्वारा
24/04/2012

क्षमा करना महिमा जी, इनके साथ  एक  पंक्ति ओर जोड़ती जाती तो  इनकी सुन्दरता एवं सार्थकता और भी बढ़ जाती। यह आलोचना नहीं, अपितु निवेदन है, कृपया अन्यथा न लें। कुछ  पंक्तियाँ तो बहुत ही सुन्दर बन पड़ीं है। जैसे- दहेज़ भारी कुरीतियों की मारी वधु बेचारी अंकुर बनी अभी नहीं खिली थी भ्रूण ही तो थी शोर है कैसा कुर्सी पे तो है बैठा अपना नेता धर्म की आड़ बाबाओ का व्योपार दुखी संसार

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय दिनेश सर … आप ने सराहा , आपको अच्छी लगी , आपका ह्रदय से धन्यवाद , जहा तक औए लाइन जोड़ने की बात है तो ये हायकू है इसके अपने शिल्पगत नियम है उसके अनुसार आप न जयादा और न कम . जोड़ सकए है बाकी मैंने जानकारी के लिए डाल दिया है आशा है आप मेरी बात का तात्पर्य समझ जायेंगे …साभार

shashibhushan1959 के द्वारा
24/04/2012

आदरणीय महिमा जी, सादर ! . “दो शब्द, पाठक का विवेक ये है हाइकू !” . गज़ब ! सधन्यवाद ! जय हो !

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय शशि सर , आपको अच्छी लगी , आपका आशीर्वाद मिला , मेरा लिखना सफल हुआ , ह्रदय से आपका धन्यवाद …जय हो :) स्नेह बनाये रखे

gopalkdas के द्वारा
24/04/2012

टूटे सपने डिग्रियां बनी भार बेरोजगार” आज के समाज में व्याप्त समस्याओं को शब्दों में अछे ढंग से सजा कर आपने क्षणिकाओं का अच्छा सृजन किया है. बधाई

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय गोपाल जी , नमस्कार , आपको अच्छी लगी , आपने सराहा , आपका ह्रदय से धन्यवाद

ajaydubeydeoria के द्वारा
23/04/2012

महिमा श्री इनकी महिमा अपरम्पार करतीं हैं चमत्कार आदरणीया शिष्या जी, हम तो सिर्फ छाये ही, आप तो बरस गयीं. इस हाइकू पर कुछ प्रकाश डालने का कष्ट करें. आपकी अति कृपा होगी.

    ajaydubeydeoria के द्वारा
    24/04/2012

    हाइकु पर जानकारी देने के लिए हार्दिक आभार………. गुरु जी प्रसन्न हुए……हा…हा…हा…

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय अजय जी , नमस्कार , आपका बहुत -२ धन्यवाद , मैं आपको कुछ जानकारी देने में सफल हुई लगता आपने आनद उठाया .. चलिय मेरा लिखना सफल हुआ ….. जय गुरु देव :)

vikramjitsingh के द्वारा
23/04/2012

क्यों बालिके.?………..कल तो बड़ा कूद-फांद रही थी, कभी इस ब्लॉग, कभी उस ब्लॉग……पेपर भी मिल गए थे आपको, अब कहाँ गए आपके तेवर……बोलिए……..बोलिए……., बैठी हो न डिब्बी में…..और अब तो बोलती भी बंद है…… कोई बात नहीं, तिजोरी की चाबी कभी किसी और दिन ले लेंगे…अभी तो आपकी रचना देखते हैं……बहुत सुन्दर है…..बिलकुल आपकी तरह…….. हा….हा……हा……इतने बुरे भी नहीं होते डाकू, वोट भी देकर जाते हैं…….हा….हा…..हा…… (अभी तो बाबा लोग भी आने वाले होंगे….तो हम चलते हैं)

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    विक्रम जी , नमस्कार ….हाँ भाई बाबा का श्राप लग गया डिब्बी में दुबारा कैद हो गयी :) जहा तक आपके पेपर सार्वजानिक करने की बात है तो अब नहीं करुँगी चुकी आपने हमे वोट दे दिया (रिश्वत ) हा हा हा …. तो फर्ज बनता है मेरा भी कुछ ……… :) आपका ह्रदय से धन्यवाद

चन्दन राय के द्वारा
23/04/2012

महिमा  जी , जागरण मंच इक उपवन है , और हम सब माली , रोज नई नई फुलवारी उगाते है , और इस बार आपके हाइकु फूलों की सुगंध पाकर बस मदहोश हो रहा हूँ

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    चन्दन जी नमस्कार , आपने तो आज हमे खुश कर दिया , बिलकुल सही कहा आपने जागरण मंच इक उपवन है , और हम सब माली , रोज नई नई फुलवारी उगाते है , आपका ह्रदय से धन्यवाद …… किन्तु होश में रहें मत्री पद की शपथ लेनी है बहुत काम करने है :) याद है ना :)

कुमार गौरव के द्वारा
23/04/2012

वाह महिमा जी. थोड़ी सी पंक्तियों में कितना कुछ कह दिया आपने….

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    गौरव जी , swagat है आपका , आपने सराहा , ह्रदय से आभारी हूँ , धन्यवाद

ANAND PRAVIN के द्वारा
23/04/2012

महिमा जी , नमस्कार आपकी महिमा अपरम्पार ……….कहाँ से लाती है आप ये तेज़ धार, रोज नए सुर में रचना बनाकर………..कर जाती हैं चमत्कार ……….. मैंने जब पहली बार हायकू को देखा था तभी मुझे लगा था की यह मजेदार चीज है………….आपने लाजवाब बना दिया……………अब कुछ मेरे भी झेलिये…………..ना समझ में आये तो आगे को धकेलिए ……… १.ताज़ी पवन घनघोर अन्धेरा एक सवेरा २. व्याकुल मन प्यासा जीवन ग्रीष्म पवन ३. शाम के चार बंद पड़ी मेरी घड़ी ४. भ्रष्टाचार सब बेहाल अपनी सरकार …………………………पहली कोशिश बचकानी ही सही ………बुराई नहीं बस बड़ाई ही करिएगा

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    सही कहा आपने आनंद जी हायकू है ही बहुत मजेदार , जितना दीखता है उतना आसान भी नहीं है , आपको अच्छा लगा , मुखे ख़ुशी हुयी आपका ह्रदय से धन्यवाद , बाकि जो आपने प्रयास किया है उसके लिए बधाई ,किन्तु ……………………………………….. शिल्प के लिहाज से सिर्फ पहला सही है / बाकी तीन हायकू नहीं है कथ्य सही है पर शिल्प के हिसाब से ये क्षणिकाएं हो सकती है …हायकू नहीं …. आप लोगो के लिए मैंने हायकू के बारे शुरुआत में जानकारी डाल दी है , आशा है आपको उस्सुए मदद मिलेगी /

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    24/04/2012

    आपकी महिमा अपरम्पार है……………..बस अज्ञानी को कुछ ज्ञान देने के लिए आभार ……….और आपका लेख लिख समझाना जोरदार …………..”wiseman” से बहस बड़ी है बेकार…………..आपको हमें समझाने के लिए आभार………….आभार ………….आभार

krishnashri के द्वारा
23/04/2012

महोदया , बहुत ही सुन्दर शब्द चित्र , डा . सरोजनी प्रीतम जी की क्षणिकाओं की याद आ गई . मेरी शुभकामना .

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय कृष्ण सर , सादर नमस्कार , सर आपने तो निशब्द कर दिया , मेरा लिखना सार्थक हुआ , आपका आशीर्वाद मिला , ह्रदय से धन्यवाद

nishamittal के द्वारा
23/04/2012

सारी समस्याएँ तो समझ में आयीं परन्तु इस विधा का मुझको ज्ञान नहीं है,महिमा जी.

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीया निशा जी , नमस्कार आपने समय दिया , लिखना सफल हुआ , शुरुआत में मैंने हायकू पे थोडा प्रकाश डाला है आशा है थोड़ी सहायता आपको मिल जाएगी ह्रदय से धन्यवाद

Santosh Kumar के द्वारा
23/04/2012

महिमा बहन ,.सादर नमस्ते छोटी छोटी खट्टी मीठी गुलगुलों जैसी हाइकू अच्छी लगी ,.क्षमा प्रार्थना के साथ कुछ कमी सी लगती है ,.पूरा सन्देश नहीं आ रहा है ,.आदरणीय रीता जी ने हाइकू के बारे में बताया था उनकी कुछ रचनाएँ पढ़ी थी ,.कुछ बड़ी थी आप उनसे मार्गदर्शन अवश्य लीजिये …सादर आभार सहित

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय संतोष भाई को मेरा नमस्कार , स्वागत है आपका , भाई जी मैं आदरणीय रीता जी का हाइकू जरुर पढना चाहूंगी मुझे उनका url एड्रेस उपलब्ध करा दें , पर मैं आपको बता दूँ अगर उनका ह्य्कू अगर वो बड़ा था तो ह्य्कू कदापि नहीं हो सकता बल्कि वो क्षणिका का होगा , बाकी मैंने ब्लॉग में थोडा ह्य्कू पे प्रकाश डाला है , बाकि मुझे तो आपकी ये लाइन बड़ी अच्छी लगी “”छोटी छोटी खट्टी मीठी गुलगुलों जैसी हाइकू अच्छी लगी “” :) आपका ह्रदय से धन्यवाद

yogi sarswat के द्वारा
23/04/2012

दहेज़ भारी कुरीतियों की मारी वधु बेचारी व्याकुल मन लगे जैसे है स्वर्ग मैया की गोद बहुत सुन्दर क्षणिकाएं , महिमा जी !

    MAHIMA SHREE के द्वारा
    24/04/2012

    आदरणीय योगी जी ,नमस्कार सराहने के लिए आपका बहुत -२ धन्यवाद


topic of the week



latest from jagran